क्यूँ भूल जाते हैं?

क्यूँ भूल जाते है ?



हम प्यार तो बहुत करते हैं
लेकिन बताना भूल जाते है
ये कविता उनके लिए जो मोहब्बत को दर्शाना भूल जाते हैं ।
तो बात कुछ ऐसी है,
हमारी डायरी से लेकर पेन की निब को भी पता होता है
कि रात को शांति में ये खाली पन्ने
किसके बारे में लिख कर भरेंगे ,
तो फिर उन पन्नों पर एक संदेश अपने
ज़हनसीब को लिखना क्यूँ भूल जाते हैं?


उन अनजाने लोगो को तो अपनी प्यार की दास्तां सुनाते नहीं थकते
तो जो सबसे ज्यादा हमारे दिल से जाना होता है
उसके साथ उन किस्सों को दोहराना क्यूं भूल जाते हैं?


हर रोमांटिक गाने को जीभर कर उसकी याद में गाते है तो उन्हीं गानों
पर उनके साथ नाचने को क्यूं नहीं पूछ पाते?


अरे उस लाल ड्रेस को भी पता है अब तो की किस दिन खरीदी गई है वो
तो फिर उसे पहनकर अपने प्यार का इजहार करने में क्यूं बहक जाते है?


सारे वादों और कसमों को एक अंगूठी से बांध देते है है तो फिर जब रिश्ता टूट रहा होता है तो उस अंगूठी का जादू दोबारा नहीं रहेगा
ये कैसे भूल जाते है।


क्यूं संभालना , गम बताना , एक दूसरे को समझाना भूल जाते है बल्कि सबसे पहले वादे हमने किए होते हैं।


क्या ज़बाब दोगे उस बारिश की , उन हवाओं को जिन्हें अपने किस्से आंखे बन्द करके सुनाई थी,समझाई थी ।
की क्यूंकि हम भूल गए एक दूसरे पर विश्वास करना इतनी आसानी से
चलो उतनी ही आसानी से सारे सवाल भी भूल जाते हैं।


जब सोचा था कि हर वक़्त में साथ निभाएंगे तो सिर्फ खुशी में रहना ही कैसे याद रह जाता है
जब उसे मनाने के लिए इतने ज़रिए ढूडे थे तो उसे रोकने के लिए एक बहाना ढूंढना क्यूँ भूल जाते है ?


सब कुछ याद रहता है ना?
तो फिर 
दिल के एहसासों को कुबूल करना क्यूँ भूल जाते हैं?
जब किसी कि दिल से निकलने के लिए हजार गलतियां ढूढ़ लेते है
तो उसे अपने पास रखने के लिए एक मौक़ा क्यूं भूल जाते है?




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